Guru Purnima 2020: Guru Purnima is celebrated on the full moon day (Purnima) in the Hindu month of Ashadha, according to the Hindu calendar. गुरु को गुरु इसलिए कहा जाता है कि वह अज्ञान तिमिर का ज्ञानांजन-शलाका से निवारण कर देता है. - यथाशक्ति फल, मिष्ठान्न दक्षिणा अर्पित करें. Join our events to engage with key stakeholders in the government, social and private sectors. Thus, Guru simply means someone who removes darkness and spread the ‘light of knowledge’. यही वह मंत्र हैं जिनसे पूर्णता प्राप्त होगी।, Happy Guru Purnima 2020 Wishes Images, Quotes, Messages In Hindi. Guru Purnima 2020: As the name suggests, Guru Purnima is celebrated in reverence of the guru or the teacher, mainly by the Hindu, Jain, Sikh, and the Buddhist communities around the world. इसके बाद ऋषि – मुनियों ने गुरु की पूजा करने की परंपरा की शुरुआत की. ॐ वेदाहि गुरु देवाय विद्महे परम गुरुवे धीमहि तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्।यही वह मंत्र हैं जिनसे पूर्णता प्राप्त होगी।, गुरु पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्रग्रहण भारत के संदर्भ में बहुत ज्यादा प्रभावशाली नहीं होगा। क्योंकि यह एक उपच्छाया चंद्रग्रहण है और यहां दिखाई भी नहीं देगा। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण धनु राशि में लगेगा। धनु राशि में गुरु बृहस्पति और राहु मौजूद हैं। अतः ग्रहण के दौरान बृहस्पति पर राहु की दृष्टि धनु राशि को प्रभावित करेगी।. The day of the Guru Purnima coincides with the Lunar Eclipse this yr. Purnima Tithi Begins – 11:33 AM on July 04, 2020 Purnima Tithi Ends – 10:13 AM on July 05, 2020 (Supply: Drikpanchang.com) Guru Purnima Significance This year, we will be celebrating Guru Purnima on July 5. ... Timings of Guru Purnima … इस दिन लोग अपने गुरु की मूर्ति रखकर उसे अच्छे ढंग से सजाते हैं. गुरु के जरिए ही मनुष्य ईश्वर तक पहुंच सकता है. Guru refers to spiritual guide who enlighten disciples by his knowledge and teachings. IPL 2020: Can Chennai Super Kings make it to playoffs after thumping win against Royal Challengers Bangalore? What is the significance of Guru Purnima? उसके बाद धूप दीप अगरबत्ती आदि जलाकर गुरु मन्त्रों की सहायता पूजा करते हैं उसके बाद प्रसाद आदि वितरण करते हैं. Purnima Tithi starts at 11:33 am on July 4 and ends at 10:13 am on July 5. The day will be celebrated on July 5. The Buddhists pay respect to Gautama Buddha on this day. 3. Guru Purnima 2020: Guru Purnima or the Vyasa Purnima is being celebrated across the country today as it marks the birth anniversary of Maharishi Ved Vyasa. Guru Purnima will be celebrated on July 5 this year, all across the country. Meanwhile, legends suggest that Veda Vyasa, the sage who wrote the famous Hindu epic Mahabharata, was born to Satyavati and Sage Parashar on this day. आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूजन का विशेष विधान है. अर्थात अंधकार को हटाकर प्रकाश की ओर ले जाने वाले को ‘गुरु’ कहा जाता है. In Vedas it is said that God cannot come to us to teach each and everything. Guru Purnima is celebrated on the full moon day (Purnima) in the Hindu month of Ashadha, according to the Hindu calendar. Guru Purnima 2020 Guru Purnima 2020: Date, time and significance of Vyasa Purnima. गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण भी लग रहा है लेकिन इसका भारत में प्रभाव नहीं रहेगा। जिस वजह से आप पूर्णिमा तिथि समाप्त होने तक गुरु पूर्णिमा की पूजा कर सकते हैं। 5 जुलाई में सुबह 10.15 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त होगी। कोरोना काल में घर पर रहकर ही गुरु की पूजा करें। गुरु से मिले दिव्य मंत्र का मन ही मन जप और मनन करें। कभी भूलकर भी दूसरे से इसकी चर्चा नहीं करनी चाहिए। इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नियमित दिनों की तरह पूजा करें और देवी देवताओं से आशीर्वाद प्राप्त करें। वहीं इस दिन अपने गुरु की सेवा श्रद्धा भाव से करें। शाम के समय में सामर्थ्य अनुसार दान-दक्षिणा देकर उनसे आशीर्वाद लें।, इस दिन को हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्मदिवस भी माना जाता है| वे संस्कृत के महान विद्वान थे महाभारत जैसा महाकाव्य उन्ही की देन है। इसी के अठारहवें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण गीता का उपदेश देते हैं। सभी 18 पुराणों का रचयिता भी महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। वेदों को विभाजित करने का श्रेय भी इन्हीं को दिया जाता है। इसी कारण इनका नाम वेदव्यास पड़ा था। वेदव्यास जी को आदिगुरु भी कहा जाता है इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है|, राहुकाल: 17:38:29 से 19:22:46 तक (इस काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है)शुभ मुहूर्त का समय - अभिजित मुहूर्त: 11:57:50 से 12:53:27 तकदिशा शूल: पश्चिमअशुभ मुहूर्त का समय -दुष्टमुहूर्त: 17:31:32 से 18:27:09 तककुलिक: 17:31:32 से 18:27:09 तककालवेला / अर्द्धयाम: 11:57:50 से 12:53:27 तकयमघण्ट: 13:49:04 से 14:44:41 तककंटक: 10:06:36 से 11:02:13 तकयमगण्ड: 12:25:38 से 14:09:55 तकगुलिक काल: 15:54:12 से 17:38:29 तक, गुरु पूर्णिमा के दिन विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों की ओर से विशेष आयोजन कर गुरुओं के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है। कोरोना वायरस के कारण इस बार सभी जगहों पर सामूहिक कार्यक्रम को स्थगित कर अपने-अपने घरों में ही गुरु का पूजन करने को कहा जा रहा है। अधिकतर जगहों पर लोग ऑनलाइन गुरु पूजन कार्यक्रम में शामिल होंगे।, ग्रहण की शुरुआत 5 जुलाई की सुबह 08:38 AM से होगी। इसका परमग्रास 09:59 AM पर होगा और इसकी समाप्ति 11:21 AM पर। उपच्छाया चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 02 घण्टे 43 मिनट की होगी। उपच्छाया चंद्र ग्रहण होने के कारण इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। अगला चंद्र ग्रहण 30 नवंबर को लगेगा।, गुरु परमात्मा के समकक्ष होते हैं। गुरु के साथ रहने से परमात्मा का दर्शन होता है। गुरु के मार्गदर्शन में ही परमात्मा से साक्षात्कार होता है। वह पूजनीय, आदरणीय और वंदनीय हैं।, गुरु जीवन का रहस्य बताते हैं। गुरु पूर्णिमा के दिन उनका सम्मान कर आशीर्वाद लें और अपने जीवन की समृद्धि के लिए उनसे ऊर्जा ग्रहण करें।, जिसका कोई गुरु नहीं, वह अंधकार में भटकता रहता है। माया के चक्कर में जीवन को नष्ट करता है और निरुद्देश्य होकर अपना वैभव खोता है।, गुरु के बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं होता है। क्योंकि जब तक उद्देश्य नहीं होगा तब तक चलने का कोई अर्थ नहीं होता है।, गुरु का आशीर्वाद मिलने से जीवन को नई दिशा मिलती है। जीवन की गति उचित मार्ग की ओर अग्रसर होती है। गुरु सदैव सम्मानित होते हैं।, गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शास्त्रीय विधि-विधान से गुरु की पूजा कर, उनका आशीर्वाद लेने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।, हर साल वर्षा ऋतु में ही गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। माना जाता है कि मानसून के दौराना मौसम सुहाना रहता है और इस समय न ही अधिक गर्मी होती और न ही सर्दी होती है। ऐसे में यह वक्त अध्ययन और अध्यापन के लिए अनुकूल रहता है।, गुरु पूर्णिमा का प्रारंभ - 4 जुलाई को सुबह 11 बजकर 33 मिनट से, गुरु पूर्णिमा का समापन - 5 जुलाई को सुबह 10 बजकर 13 मिनट तक, गुरु पूर्णिमा को व्‍यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन महाभारत के रचयिता महर्षि वेद व्यास जी का अवतरण हुआ था। सनातन संस्कृति के अठारह पुराणों के रचयिता महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। उन्होंने ने ही वेदों की रचना कर उनको अठारह भागों में विभक्त किया था। इसी कारण उनका नाम वेद व्यास पड़ा था। महर्षि वेद व्यास को आदि गुरु भी कहा जाता है।, कल गुरु पूर्णिमा है और कल ही चंद्रग्रहण भी लग रहा है। इसलिए इस बात का खास ख्याल रखें कि समय रहते पूजा विधान को संपन्न कर लें।, कल गुरु पूर्णिमा है। गुरु पूर्णिमा की पूजा घर पर भी की जाती है। इसके लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं और नित्यकर्म से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी करें। यदि गुरु ब्रह्मलीन हो गए हैं तो उनका चित्र एक पाट पर सफेद कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। गुरु की कुमकुम, अबीर, गुलाल आदि से पूजन करें। मिठाई, ऋतुफल, सूखे मेवे, पंचामृत का भोग लगाएं। सुगंधित फूलों की माला समर्पित करें। इसके बाद आरती उतारकर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करें।, इस दिन भक्त अपने गुरु के सम्मान में कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे और उनको श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। इस दिन बड़ी संख्या में लोग गुरु से दीक्षा भी ग्रहण करते हैं। गुरु की कृपा से ज्ञान प्राप्त होता है और उनके आशीर्वाद से सभी सुख-सुविधाओं, बुद्धिबल और एश्वर्य की प्राप्ति होती है।. 4. One pays obeisance to the Guru or teacher on this day, thanking for all the knowledge and life-lessons. ॐ गुं गुरुभ्यो नम:। Ladakh Standoff: India, China to hold 8th round of Corps Commander level.. NASA to announce 'exciting new discovery' about Moon on October 26; check.. Bihar Assembly Elections 2020: Tracing Sushil Kumar Modi's journey from a.. IPL 2020 playoffs fixtures announced by BCCI; check details here. 2. Traditionally this day is reserved for Guru Puja or Guru Worship. By continuing to use our website, you agree गुरु प्राप्ति के लिए एकलव्य के समान अपार श्रद्धा और विश्वास की आवश्यकता है. Guru Purnima 2020 Guru Purnima or the Vyasa Purnima is being celebrated across the country today as it marks the birth anniversary of Maharishi Ved Vyasa . Here are five more things you can do on Aarogya Setu app, find out! Guru Purnima 2020: On this day, devotees worship their spiritual gurus and visit temples to seek blessings. ॐ गुरुभ्यो नम:। Guru Purnima 2020 Date & Time: Guru Purnima is celebrated every year on full moon day of the Shakha Samavat, according to the Hindu calendar. Come, be a part of the Newsd Revolution. Some legends also say that sage Veda Vyasa had classified the Vedas into four different texts - Rig Veda, Yajur Veda, Sama Veda and Atharva Veda and therefore we celebrate Guru Purnima on this day. हिन्दू धर्म में गुरु पूजा का विशेष विधान है. गुरु पूर्णिमा तिथि सामप्‍त: 5 जुलाई 2020 को सुबह 10 बजकर 13 मिनट तक, Happy Guru Purnima 2020 Wishes Images, Quotes, Status: हीरे की तरह तराशा गुरु ने जीवन को आसान बनाया गुरु ने… गुरु पूर्णिमा पर अपनों को इन संदेशों से करें विश, 1. Apart from Hindus, the Buddhists, Jains, and Sikhs also observe Guru Purnima. Guru Purnima 2020 timings: Purnima Tithi starts at 11:33 am on July 4 and ends at 10:13 am on July 5.. Guru Purnima 2020 Puja Vidhi: The Buddhists pay respect to Gautama Buddha on this day. This year, we will be observing Guru Purnima on July 5. On this day, students (shishya) worship their Gurus (Teachers or idols) for giving their knowledge and mantra to live life. जीव को ईश्वर की अनुभूति और साक्षात्कार कराने वाली मान प्रतिमा गुरु ही हैं. Copyright © 2018-2020 Newsd Media Pvt Ltd, Guru Purnima 2020: Date, timings, puja vidhi, and mantras, FIFA to inspect 2021 U-20 World Cup venues in Indonesia, Lunar Eclipse July 2020: Sutak timings and precautions you need to take during Chandra Grahan, Allu Arjun tops the list of Ormax Stars India Loves Telugu, fans trend #Pushpa on Twitter, Durga Visarjan 2020: Everything you need to know about Sindoor Khela and bidding goodbye to Goddess Durga, Why #boycottfranceproducts is trending on Twitter? Here are 5 best free online games to kill boredom, The Zoom Prisoner: India’s top VC Sanjay Nath perfectly captures sentiment of WFH, Over Rs 25,000 cr involved in Franklin Templeton’s shut funds, Coronavirus Impact: Government freezes dearness allowance of its employees, Both Ramayan and Mahabharat shows enticed the viewers as well as advertisers, 75 million people have already downloaded Arogya Setu app, Clinical trial of plasma therapy on coronavirus patients shows positive results: Arvind Kejriwal, Opinion: What plagues in Islamic past teach us about response to pandemics. इसलिए ग्रहण काल में गर्भवती स्त्रियों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए ताकि ग्रहण की इस नकारात्मक ऊर्जा से गर्भ में पल रहे बच्चे को बचाया जा सके. Purnima Vrat 2020 dates along with time can be found below. Guru Purnima also known as Vyasa Purnima is the day to worship and honor one’s teacher or guru. Many people donate food and clothes on this auspicious day. it is on this day, many millennia ago that the transmission of Yoga began and the Guru-shishya paramparya was started by … कहा जाता है कि महर्षि वेद व्यास ने सबसे पहले भागवत पुराण की कथा ऋषि मुनियों को सुनाई थी. Our innovative timeline and follow functionalities allow you to track what is of essence to your sensibilities. On this day disciples offer Puja or pay respect to their Gurus. - इसके बाद उन्हें श्वेत या पीले वस्त्र दें. इस चंद्रग्रहण का गुरु पूर्णिमा की पूजा पर कोई असर नहीं पड़ेगा. Guru Purnima 2020 Date, Timing, Puja Vidhi, Vrat Katha, Muhurat, Mantra, Story, Aarti in Hindi: महर्षि वेद व्यास संस्कृत के महान विद्वान थे। महाभारत जैसा महाकाव्य उनके द्वारा ही … गुरु पूर्णिमा को अपने गुरु का पूजन, वंदन और सम्मान करना चाहिए. IPL 2020, MI vs RR: Jofra Archer grabs a blinder at third man to dismiss.. इस कारण गुरु का साक्षात् त्रिदेव तुल्य स्वीकार किया है. ऐसे में गुरुओं की पूजा भी भगवान रूपी की जानी चाहिए, गुरु पूर्णिमा के दिन ही चंद्रग्रहण भी हैं। इसलिए इस बात का खास ख्याल रखें कि समय रहते पूजा विधान को संपन्न कर लें। चंदग्रहण बुधवार देर रात 1 बजकर 33 मिनट से लगेगा। ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले यानी मंगलवार को शाम 4 बजे से लग जाएगा। ग्रहण और सूतक दोनों में पूजा का निषेध रहता है।, 5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का त्योहार है। इस पर्व पर अपने गुरु के प्रति आस्था को प्रगट किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन विधिवत रूप से गुरु पूजन किया जाता है। इसको व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन को चारों वेदों के रचयिता और महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना करने वाले वेद व्यास की जयंती के रूप में मनाया जाता है।, हिंदू धर्म के मुताबिक महर्षि वेद व्यास का जन्म गुरु पूर्णिमा के दिन हुआ था.